लखनऊ स्थित KGMU में रेजिडेंट डॉक्टर से जुड़े धर्मांतरण के दबाव के आरोपों का मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ने पीड़ित डॉक्टर से फोन पर बातचीत कर न्याय दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद शासन स्तर पर तुरंत कार्रवाई शुरू हुई और पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई।
पीड़ित की सुरक्षा बढ़ाई गई
प्रशासन ने पीड़ित महिला डॉक्टर की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुलिसकर्मी तैनात कर दिए हैं। वहीं, KGMU की विशाखा कमेटी इस मामले की जांच कर रही है और अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपने की तैयारी में है। शुरुआती जांच में आरोपों से जुड़े कुछ साक्ष्य सामने आने की बात कही जा रही है, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई तय मानी जा रही है।
क्या हैं आरोप
पीड़ित डॉक्टर का आरोप है कि एक सहपाठी रेजिडेंट डॉक्टर ने प्रेम संबंध के नाम पर शादी के लिए दबाव बनाया और इसके साथ धर्म बदलने का दबाव भी दिया। मना करने पर कथित तौर पर मानसिक प्रताड़ना बढ़ी। बताया गया कि 17 दिसंबर को पीड़िता ने अत्यधिक तनाव में दवा की ओवरडोज लेकर आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश की थी, जिसके बाद मामला सामने आया।
इलाज और वर्तमान स्थिति
पीड़िता को तुरंत ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद आईसीयू में शिफ्ट किया गया। हालत में सुधार होने पर 19 दिसंबर को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। फिलहाल वह सुरक्षित हैं और जांच में सहयोग कर रही हैं।
जांच और प्रशासनिक कार्रवाई
KGMU प्रशासन ने मामले की जांच के लिए विशाखा कमेटी को जिम्मेदारी सौंपी है। कमेटी ने दोनों पक्षों से बयान लिए हैं और दस्तावेजों की जांच की जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
महिला आयोग से भी की गई शिकायत
पीड़ित डॉक्टर ने राज्य महिला आयोग के समक्ष भी अपना पक्ष रखा है और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
कैंपस में बढ़ी गतिविधियां
मामले के सामने आने के बाद KGMU परिसर में गतिविधियां तेज हैं। विभिन्न संगठनों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है, वहीं प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून के दायरे में रहकर निष्पक्ष जांच की जाएगी।








