CM योगी का एक्शन: योगी सरकार ने भ्रष्टाचार पर की बड़ी कार्रवाई, चार अफसर बर्खास्त और तीन रिटायर्ड अफसरों पर गिरी गाज
एक दशक पुराने घोटाले की फाइलें फिर खुलीं
CM योगी का एक्शन एक बार फिर सुर्खियों में है। योगी सरकार ने समाज कल्याण विभाग में हुए पुराने छात्रवृत्ति और पेंशन घोटाले की जांच दोबारा खोलते हुए चार अधिकारियों को पद से हटा दिया है।यह घोटाला लगभग एक दशक पुराना है, जिसमें लाभार्थियों की सूची से लेकर खातों में ट्रांजैक्शन तक धांधली की गई थी।फाइलें वर्षों से दबाई गईं, जांच ठंडी पड़ी रही, और आरोपी अधिकारी सेवानिवृत्ति या तबादले से बच निकलते रहे।लेकिन इस बार योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यह मामला फिर से खोला गया।जांच टीमों ने सभी पुराने दस्तावेजों की समीक्षा की और गबन की पूरी रकम का हिसाब निकाला।
भ्रष्टाचार का नेटवर्क: चार अफसरों की मिलीभगत
जांच में सामने आया कि बर्खास्त अफसरों ने छात्रवृत्ति और पेंशन योजनाओं के फंड में करोड़ों रुपये की हेराफेरी की थी।कई फर्जी लाभार्थियों के नाम जोड़कर काल्पनिक खातों में सरकारी धन ट्रांसफर किया गया।कुछ अधिकारियों ने अमान्य निजी संस्थानों और फर्जी कॉलेजों में छात्रवृत्ति की रकम भेजी, जबकि कुछ ने पेंशन वितरण प्रणाली में बैंक खातों से हेराफेरी की।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा मामला संगठित वित्तीय धोखाधड़ी का उदाहरण है, जहाँ सिस्टम का दुरुपयोग कर सरकारी योजनाओं का पैसा निजी खातों में पहुंचाया गया।
रिटायर्ड अफसरों पर भी गिरी गाज
सरकार ने केवल सेवा में मौजूद अफसरों पर ही नहीं, बल्कि सेवानिवृत्त अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की है।इन अधिकारियों की पेंशन में 10% से 50% तक की स्थायी कटौती की गई है।साथ ही, जिन योजनाओं में इनके कारण सरकारी धन का नुकसान हुआ, उसकी वसूली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति
यह कार्रवाई योगी सरकार की “जीरो टॉलरेंस फॉर करप्शन” नीति का हिस्सा है।पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने शिक्षा, नगर निकाय, राजस्व और समाज कल्याण विभाग में कई स्तरों पर बड़ी कार्रवाई की है।CM योगी का यह कदम साफ संदेश देता है कि भ्रष्टाचार करने वालों को अब कोई रियायत नहीं मिलेगी।
सूत्रों के मुताबिक, कई अन्य पुराने मामलों की जांच भी शुरू हो चुकी है और जहां जरूरत होगी, वहां एफआईआर दर्ज कर वसूली की जाएगी।
एफआईआर और वसूली की प्रक्रिया शुरू
सरकार ने दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और सरकारी धन की वसूली के निर्देश जारी कर दिए हैं।जांच के शुरुआती चरण में ही करोड़ों रुपये की हेराफेरी सामने आ चुकी है।विभागीय सूत्रों के अनुसार, कुछ और अधिकारी अभी भी जांच के दायरे में हैं, जिनके नाम जल्द सार्वजनिक किए जाएंगे।







